पंजाब दियां रंगीन जट्टीयां – पार्ट – 2

दोस्तो मे गौरव कहानी का दुसरा पार्ट लेकर आपके सामने हाज़िर हू, उम्मीद करता हू के पहला पार्ट अपको पसंद आया होगा। तो चलिये कहानी को आगे बढ़ाता हू, यहा सरबी लाले की दुकान से चली जातीहै।

सरबी के जाने के बाद लाला फिर से बही खाते मे फसलो का जोड तोड करने लगा। अभी पांच मिनट ही हुए थे लाले को फिर से राम राम की अवाज सुनाई दी। लाले ने नज़र उठा कर देखा तो सामने रितु खडी थी। रितू लाले के पास काम करने वाले बाबू की बीवी थी। वह जात के बौरिये थे। रितु 34की थी और फिगर 383640था जो लाले ने ही किया था। बाबू क्योके सराब पीके टुन्न रेह्ता था तो रितु अक्सर लाले के बिस्तर पर आ जाती थी। रितु को देखते लाले की आंखो मे चमक आ गयी। “अरे आ रितु केसे आना हुआ”। लाले ने लण्ड मसल्ते हुए पुछा जो सरबी के ख्यालो मे खडा था।
“सेठ जी कुच पेसे चाहिये थे घर का राशन लेने के लिये”। रितु ने जवाब दिया। “अरे तो अन्दर आजा ना बहर क़्यो खडी है”। लाला ने उठते हुए बोला और बहर देखने लगा के कोई है तो न्ही। जेसे ही रितु अन्दर ज्ञी लाले ने दुकान का दरवाजा ल्गा दिया और रियु को पकड लिया “क्या रितु इत्ने दिन कहा थी दिखायी न्ही दी”। लाले के हाथ रितु के मम्मे मसल ररहे थे।
“अह्ह्ह्ह सेठ जी घर मे थी अपको तो उस सराबीका पता है”। रितु ने जवाब दिया। “लेकिन आप आज इत्ने उतावले क्यो हो रहे है, पहले तो कभी एसा नही किया आपने”। रितु लाले की एस हरकत से चौंक गयी थी क्योके पहले कभी भी लाला रितु पर एकदम एसे न्ही टूटा था। लाला को रितु को दुकान के निचे बने सुरंग टाइप कमरे मे ले गया और लाईट जला दी। “अरे मत पुछ रितु अभी अभी सरबी ज्ञी है य्हा से”। लाले ने बोला। रितु सरबी को जानती है और दोनो अच्छी सहेलिया है। “हा तो उसने एसा क्या कर दिया”। रितु ने बैड प्र बेठ्ते हुए पुछा। लाला भी रितु के पस बैड पर बेठ गया “क्या नही किया, मस्त जिस्म है साली जट्टी का बडे मुम्मे और उबरे हुए चुतड़, दिल तो किया था के उसे वही पकड के पेल दू”। लाले ने सरबी को याद करते हुए कहा। “बस इत्नी सी बात, और मे पता न्ही क्या क्या सोच रही थी मन मे”। रितु बोली। “इत्नी सी बात मतलब तू कर सकती मेर काम, लेके आयेगी जट्टी को लाले के इस बिस्तर पे”। लाले की आखोंमे चाम्क आ गयी और उसे सरबी अपने सामने बैड पर लेटी हुई दिखने लगी। “क्यो न्ही सेठ जी आप तो जानते है के सरबी के साथ मेरि कित्नी बनती है, हा लेकिन उसकी फीस लगेगी”। रितु ने लाले की तरफ देख्ते हुए बोला।
“अरे मुंह मांगी फीस दे दुगा जो कहोगी मिलेगा जान, कहो तो अबी दे सक्ता हू जो मांगोगी। , बस एक बार जट्टी को मेरे बिस्तर पे ले आ, “। लाले ने रितु की बोला। “अरे ज्यदा कुछ नही चहिये सेठ जी बस मुझे अपना खाता साफ चाहिये”। रितु ने भी गरम लोहे पर हथौड़ा मार दिया। “जिस दिन जट्टी को लाले के बिस्तर पे ले आयेगी उस दिन तेरा खता साफ कर दूगा, तब तक नही”। लाले ने जवाब दिया। “तो बस समझो ले सरबी आपकी हो गयी”। रितु ने लाले को विस्वास दिलाते हुए कहा। “आये हाये मेरि रानी बडे पुणय का काम करेगी तू उसे यहा लाके”। लाले ने रितु की चुन्नी उतारते हुए कहा। “आपकी गुलाम जो ठहरी”। रितु ने लाले को देखते हुए बोला। लाला अप्ने अपके उतर कर अंडरवेअर मे था। उसने रितु की करती उतर फेन्की और उसके मुम्मे चुस्ने लगा। रितु भी सिस्किया लेते हुए लाले के गठीले बदन को सहलाए जा रही थी। लाले ने रितु को निचे बेठ्ने को कहा। रितु ने निचे बेठ लाले का अंडरवेअरउतर दिया और उसका मूसल जेसे लण्ड को सहलाने लगी। लाले ने लुन्द पकड रीति के होंठो पर टोपा मसल्ने लगा। रितु ने जेसे ही अपना मुंह खोल लाले के लण्ड को मुंह मे लिया तो लाले की सिसकी निकल गयी “ओह रितु जान चुस जान लाले का लण्ड”। रितु भी मजे से लुन्द चूसे जा रही थी तो कभी निचे लाले के टट्टौ पा भी जीभ फेर रही थी। करीब 20मिंट लण्ड चुसाने के बैड लाले ने रितु को
खडी कर बैड पे लेटा उसकी सलवार भी उतार दी। लाला खुद निचे खडा था, उस्ने रितु की टांगो को फैलाया और बीच मे चुत पे लण्ड रगड़ने लगा। “सांप को उसकी गुफा तो दिखा रानी”। लाले ने रितु को आंख मारते हुए कहा। रितु भी लाले की बात समझ गयी और उस्ने अपने हाथ से चुत को खोल दिया। जेसे ही रितु ने चुत को खोला लाले ने जोर से एक घस्सा मारा और एक ही बर मे अपना पुरा लण्ड रितु की चुत की गहरायी मे उतर दिया। “स्स्स्स्स्स्स आअह्ह्ह्ह्ह सेठ जी”रितु ने हल्की सी सिस्कारी निकली। रितु भी अब लाले के 12इन्च लण्ड लेने की आदी हो चुकी थी। लण्ड को पुर चुत मे उतर लाले ने रितु के मम्मे पकड लिये और जोर जोर से झटके मारने लगा। रितु भी आह्ह्ह्ह स्सिस्स्सी ह्हये लाला जी कहती हुई लाले के लण्ड का मजा लेने लगी।
लाला दनादन रितु को पेले जा रहा था ओर झुक कर उसके मम्मे चुस्स लेता करीब घंटेभर बाद लाला ने अपने गरम माल की पिचकारी रितु की चुत मे ही छोड़ दी। “ओह रितु जान” कहते हुए लाला रितु के बगल मे लेट गया। थोडे टाईम बैड रितु ने अपने कपडे पहने”लाला जी रुपए दो मुझे जाना है अब बहुत देर गयी है”। रितु ने बोला। लाला भी अब अपने कपडे पहनने लगा, “बता तो सही कित्ने चाहिये”।
“पांच हज़ार देदो लाला जी” रितु बोली।
“अरे थोडे ले जा पहले ही बहुत चले ग्ये है तेरी तरफ” लाला रितु को देखते हुए बोला। “देदो लाला जी वेसे भी अब खाता तो साफ होने ही वाला है” रितु ने मुस्कुराते हुए कहा। “”बहुत चालाक है साली तू, ठीक है लेजा लेकिन वादा मत भुलियो अपना” लाले ने 5हज़ार रुपए रितु को देते हुए कहा। “नही भुलुगी लाला जी ” रितु ने रुपे पकडे और चली गयी।
लाला फिर से सरबी की यादो मे खो गया।

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